औरंगाबाद में बम विस्फोट, डिप्टी कमांडेट समेत तीन शहीद

मीनापुर  कौशलेन्द्र झा
वाले प्रशासन व सम्य समाज के लिए शर्म की बात नही तो और क्या है? शर्म इसलिए भी कि घटना के बाद नेता एक दुसरे पर आरोप मढ़ कर अपना पल्ला झाड़ने में लगे हैं। क्या डिप्टी कमांडेंट इंद्रजीत सिंह के इलाज में कोताही बरते जाने की उच्चस्तरीय जांच होगी? क्या दोषी लोगो को चिन्हित करके उसे सजा दिया जायेगा? ऐसे कई सवाल मेरे जेहन को परेशान कर रहा है। मैं कौशलेन्द्र झा इस अमानवीय घटना की भर्त्सना करते हुए, इसकी उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग करता हूं। दरअसल सोमवार को बरंडा मोड़ के पास सड़क के किनारे खोदे गए एक गड्ढे से निकले तार वहां देखे गए जिससे यहां लैड माइन्स होने की आशंका जताई गई। इस सूचना पर कोबरा के सहायक कमांडेंट टी.एन. सिंह ढबिरा थाने के थानाध्यक्ष अमर चौधरी के साथ बाइक पर सवार होकर उक्त स्थल पर पहुंचे। यहां तार और जमीन में दबे बम की जांच के लिए कुछ बैट्री और अन्य उपकरण मंगाये गए व जांच के बाद हैवी बम होने की बात कह कर सीआरपीएफ के कुछ जवानों को यहां माॠनिटिरग में लगा दिया गया। इसी दौरान कुछ जवानों ने बम को डिफ्यूज करने की कोशशि की और वह फट गया। इस विस्फोट में दो सीआरपीएफ जवान राजस्थान निवासी पवन कुमार एवं आंध्र प्रदेश निवासी टी. पन्ना राव की घटनास्थल पर ही मौत हो गई जबकि नौ अन्य लोग घायल हो गए।

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