मीनापुर  कौशलेन्द्र झा  
‘हम तो डूबेंगे, औरों को भी डुबो देंगे.’ जी हां, बिहार के चुनावी महाभारत में कुछ इसी तर्ज पर कई उम्मीदवारों ने नाराज होकर चुनावी मैदान में खूंटे गाड़ दिए हैं. कुछ तो पार्टी का टिकट नहीं मिलने पर मजबूरीवश अखाड़े में हैं तो कुछ अपनी उपस्थिति दर्ज कराके पार्टी के शीर्ष नेताओं को चुनौती दे रहे हैं. मकसद सिर्फ इतना कि हम तो डूबेंगे ही आपको भी डुबो देंगे. हालांकि जीत की हसरत सभी उम्मीदवारों की है और जब तक चुनाव परिणाम सामने नहीं आ जाता. किसी की दावेदारी कम नहीं आंकी जा सकती है. ऐतिहासिक भूमि वैशाली से चर्चा शुरू करें तो यहां जदयू के लिए पार्टी की बागी उम्मीदवार अनु शुक्ला परेशानी खड़ी कर रही हैं. सत्ताधारी जदयू ने यहां से विजय साहनी को उम्मीदवार बनाया है. स्थानीय विधायक अनु शुक्ला वैशाली से टिकट मांग रही थीं, किंतु टिकट नहीं मिला. अनु शुक्ला जदयू के ही दबंग पूर्व विधायक विजय कुमार शुक्ला उर्फ मुन्ना शुक्ला की पत्नी हैं. अनु शुक्ला के बागी तेवर से जदयू को भूमिहारों का कोपभाजन बनना पड़ सकता है. वैसे वैशाली संसदीय क्षेत्र से राजद के दिग्गज रघुवंश प्रसाद सिंह पिछले पांच लोकसभा चुनाव से विजय पताका लहराते आ रहे हैं. ऐसे में जदयू को युद्ध में भिड़ने के लिए नयी रणनीति पर विचार करना होगा. दूसरी तरफ भाजपा-लोजपा-रालोसपा गठबंधन की तरफ से यह सीट लोजपा को मिली है. ज्ञात हो कि वैशाली जिले के अंतर्गत आने वाले हाजीपुर संसदीय क्षेत्र से लोजपा सुप्रीमो रामविलास पासवान नए तेवर में मैदान में हैं