मीनापुर  कौशलेन्द्र झा  

कल रात एक चैनल पर समाचार वाचक अचानक गीत गाने लगा - उपर पान की दुकान की दुकान, नीचे भगवा की जुटान। हुआ यें कि हमारे केजरीवाल साहेब को बनारसी पान खाने की इच्छा हो गयी। तो बनारस के तंग गलियों की थकान मिटाने के लिए पहुंच गए बनारस के एक मसहूर पान के दुकान पर। वह दुकान उपरी मंजिल पर था और हमारे केजरीवाल साहेब अभी गिलोरी खाए भी नही कि कान में आवाज पड़ी, मोदी...मोदी....मोदी....। नीचे झांक कर देखा तो भगवा समर्थको की भीड़। हमारे केजरीवाल साहेब ने फ्लाइंग किस मारा और पिछले दरबाजे से खिसग गये।
पर ये भगवा वाले भी हद करतें हैं भाई। पहले से ही पिछले दरबाजे पर घात लगाए बैठे थे और निकलते ही अंडों की बौछार कर दी। एक खबर आई कि भाषण करने गए थे, भीड़ ने टमाटर दे मारा। वेचारे, समझ पाते उससे पहले ही पत्रकार जी पहुंच गए। भोंपू उनके मुंह से सटाया और सवाल...इस पर आपको क्या कहना है? जनाव, पहले टमाटर का दाग तो पोछ लेने देते। खैर...हमारे केजरीवाल साहेब भी मजे हुए खिलाड़ी हैं। कहने लगे कि ये बच्चें हैं। कल एक गांव में गया तो वहां भी मोदी मोदी हो रहा था। कागज का टुकड़ा पढ़ाया तो सभी केजरी केजरी करने लगे।
भाईयों, अब मेरे समझ में आया कि हमारा भारत महान कैसे है? कैसे हम दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र है? दुसरे देश वाले चुनाव के दौरान अपनी राष्ट्रीय नीति, आर्थिक विकास और अपनी विदेश नीति को उछालतें हैं। हम चुनाव आतें ही उसकी पत्नी को ढ़ूढ़ निकालतें हैं। कौन किसका फोन टेप कर रहा है, निकाल लातें हैं। नेताजी के कितने बच्चें हैं? यदि नही है तो क्यों नही है? जीजाजी अमीर कैसे हो गए? नेताजी कुत्ता के पिल्ला हैं या कुत्ता का बड़ा भाई? राष्ट्रीय चैनल पर बैठ कर हमारे टीकाकार लगातार तीन रोज तक इसी विषय पर वहस करतें हैं। कौन जहर उगल रहा है और कौन जहर की खेती कर रहा है? इतना ही नही टाफी या गुब्बारा हाथ लग जाए तो एक सप्ताह तक उसको छोरते नही। दुनियां वालों अब समझ में आया कि हम सबसे बड़े लोकतंत्र कैसे हैं?